ये एक ऐसे जिंदादिल युवक की कहानी है, जिनके हाथ ना होने के बाद भी पैरों से कार चलाने का लाइसेंस मिला

ये एक ऐसे जिंदादिल युवक की कहानी है, जिनके हाथ ना होने के बाद भी पैरों से कार चलाने का लाइसेंस मिला. हम बात कर रहे हैं इंदौर के रहने वाले विक्रम अग्निहोत्री की. इन्होंने अपनी मेहनत, लगन और काबिलियत के दम पर देश ही नहीं पूरी दुनिया में अपने हुनर का लोहा मनवाया है.

जब काटने पड़े हाथ

महज 7 साल की उम्र में विक्रम के हाथ करंट लगने से खराब हो गये थे. जिसके बाद डॉक्‍टर्स को इनके हाथ काटने पड़े. उन्होंने बचपन में ही इस बात को बखूबी समझ लिया था कि हाथों की कमी उनके जीने के तरीका नहीं बदल सकती. जो काम से हाथ से किए जा सकते हैं वह सभी काम विक्रम पैरों से कर लेते हैं. कार चलाने के साथ वह स्विमिंग भी करते हैं. उन्होंने अपनी पढ़ाई रेगुलर स्कूल से की. साथ ही मास्टर डिग्री हासिल करने के साथ वह एक मोटिवेशनल स्पीकर हैं.

जब मिला ड्राइविंग लाइसेंस

ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना विक्रम के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी. क्योंकि लोगों के मन में यही सवाल था कि बिना हाथ के वह कार कैसे चला पाएंगे.

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लाइसेंस के लिए विक्रम ने हर अधिकारी से गुहार लगाई कि एक बार उनकी ड्राइविंग को देख लिया जाए. उन्होंने दिसंबर 2014 में ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आरटीओ ऑफिस में एप्लाई किया था, लेकिन लाइसेंस नहीं मिला. जिसके बाद उन्होंने परिवहन मंत्री से लेकर केंद्रीय परिवहन मंत्री और परिवहन मंत्रालय से लेकर प्रधानमंत्री तक अपनी बात रखी. साल 2016 में उन्हें लाइसेंस दे दिया गया.

बता दें उनके पास एक ऑटोमेटिक गियर शिफ्ट वाली कार भी है, जिसकी स्टीरिंग वह दाएं पैर से पकड़ते हैं और बायां पैर एक्सेलरेटर पर रहता है. उन्होंने अपनी कार के दाहिने तरफ ही ब्रेक और एक्सेलरेटर लगवाए हैं. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक लाइसेंस मिलने के वह अब लगभग 22 हजार किलोमीटर कार चला चुकें है.