सिविल सर्जन कार्यालय बेगूसराय में फर्जी लिपिक की भरमार

सिविल सर्जन कार्यालय बेगूसराय में फर्जी लिपिक की भरमार

राष्ट्र संवाद आप लोग के बीच स्वास्थ्य विभाग का घोटाला लेकर आया है सरकार स्वास्थ्य विभाग में 1985 के बाद अभी तक कोई बहाली नहीं हुई है लेकिन फर्जी तौर पर अभी भी बहुत लिपिक काम कर रहे हैं! यह लोग सचिवालय से फर्जी तौर पर ट्रांसफर लेटर या अनुकंपा बनवा लेते हैं फिर ऊपर तक मिलीभगत होने के कारण अपना योगदान देते हैं इस पर डॉ अरविंद कुमार आरटीआई कार्यकर्ता का कहना है की
आज समाचार पत्र में 2002 में फर्जी गिरोह करीब 150 कर्मियों का विभिन्न जिलों में ट्रांसफर के आधार पर फर्जी नियुक्ति की गई!

हर एक जिला में एक स्वास्थ्य विभाग में दो लाख रुपए लेकर नियुक्ति की गई! बिना सेवा संतुष्टि कराए सिविल सर्जन से वेतन देना शुरु कर दिया! इसी पर तत्कालीन जिला पदाधिकारी हरजीत कौर को डॉक्टर अरविंद प्रसाद सिंह ने फर्जी के संबंध में 1998 मैं आवेदन देते हुए आगाह किया की स्वास्थ्य विभाग में धांधली हो रही है! जांच शुरू हुई लेकिन कोई भी रिजल्ट नहीं आया!
इसी कारण से डॉक्टर अरविंद प्रसाद सिंह फिर से आवेदन देते हुए स्वास्थ्य विभाग को RTI के तहत फिर से आगाह किया! सूचना अधिकार से मधुबनी सिविल सर्जन कहा गया कि करीब 34 कर्मियों की फर्जी होने की सूची भेजी गई!

जिला पदाधिकारी मनोज कुमार के द्वारा नंदकिशोर पंडित एवं शिवनंदन महतो दोनों का आवेदन रोकने का आदेश दिया गया! एवं जांच पदाधिकारी जिला कोषागार पदाधिकारी बेगूसराय को बनाया गया! लगभग 2 वर्षों तक हर एक पहलू पर जांच की गई! शिवनंदन महतो पर कार्यवाही हुई तथा नंदकिशोर पंडित लिपिक का भी वेतन रोक दिया गया! और प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया गया!
तत्कालीन जिला पदाधिकारी सीमा त्रिपाठी ने प्राथमिकी दर्ज की!

लेकिन इस बीच सिविल सर्जन बेगूसराय ने शिवनंदन महतो का ट्रांसफर खोदावंदपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मैं कर दिया ताकि आगे होने वाली कार्रवाई से बच सकें! खोदावंदपुर थाना का कांड संख्या 111/ 2016 पर 3400000 रुपए लिए गए वेतन एवं सूद जोर कर वसूली के लिए प्राथमिक दर्ज की गई लेकिन आज तक ना वह गिरफ्तार किए गए और ना ही कोई पैसों की भरपाई हुई! इस तरह स्वास्थ्य विभाग का पैसा मिलीभगत से लुटाया जा रहा है! नंदकिशोर पंडित उच्च न्यायालय में दो केस दर्ज किया !

एक पैसे के लिए और दूसरा नियुक्ति के लिए! तत्कालीन जिला पदाधिकारी नौशाद यूसुफ को 4 सप्ताह में जांच कर फैसला लेने का आदेश दियाI जो कि अभी तक किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की गईI नंदकिशोर पंडित प्रधान लिपिक स्वास्थ्य विभाग में अभी भी अपना योगदान दे रहे हैंI