8वीं पास इस किसान को मोदी ने भेजा था बुलावा, आज लोग कहते है साइंटिस्ट

8वीं पास इस किसान को मोदी ने भेजा था बुलावा, आज लोग कहते है साइंटिस्ट

बाराबंकी (यूपी). यहां थाना सफदर गंज इलाके के दौलतपुर में जन्में रामशरण वर्मा को किसानी के लिए जाना जाता है।

बता दें, ये किसान बस आठवीं पास है उसके बाद भी लोग इसे कृषि वैज्ञानिक बुलाते हैं। आज हजारों किसान प्रदेश के बहुत से जिलों में रामशरण मॉडल पर खेती कर रहे हैं और सफल है।

1990 से शुरू किया हाईटेक खेती…

– रामशरण ने बताया, ”मैं काफी निराश हो गया तो मैंने खेती करने की सोची।

इसके लिए मैंने अपनी 6 एकड़ की पैत्रिक भूमि पर केले की खेती की लेकिन तमाम रूपए लगाने के बाद भी सिर्फ बीस हजार रूपए ही कमा सका।”

– ”इससे परेशान होकर मैंने उन राज्यों का दौरा किया, जहां उन्नत किसानी होती है।

अलग-अलग राज्यों से किसानो से मिलकर लौटने के बाद 1990 में हाईटेक खेती करनी शुरू की।”

– ”एक मान्यता थी कि टमाटर नासिक से ही बढ़िया आता है लेकिन मैंने अपनी खेती से डेढ़ गुना ज्यादा टमाटर पैदा किया।

नए तरीके अपना कर और पारंपरिक खेती से हटकर आलू का उत्पादन भी रिकॉर्ड हुआ।

इनकी तकनीकी है सबसे खास 

– बिजनौर से किसानी के सीख रहे दिलीप वर्मा ने कहा, ”मैंने इनके बारे में बहुत सुना था, खेती से फायदा नहीं होने पर इनसे मिला।

खेती के मामले में ये वैज्ञानिक को फेल कर रहें हैं।”

– ”आज इनके टमाटर बिहार, बंगाल, असम, महाराष्ट्र सहित देश के कोने-कोने में तो जाता है।

इसके अलावा लोग विदेशों में भी इसका निर्यात करते हैं।”

कई अवार्ड जीत चुके हैं रामशरण

– 2005 में पहली बार तत्कालीन डीएम ने चावल का सबसे ज्यादा उत्पादन करने पर अवार्ड दिया था।

उन्हें जगजीवन राम किसान पुरस्कार, आदर्श किसान पुरस्कार, उद्यान पंडित अवार्ड, उद्यान रत्न अवार्ड, इनोवेटिव फार्मर का अवार्ड, बेस्ट फार्मर अवार्ड, उत्तर प्रदेश गौरव सम्मान अवार्ड और पटेल रत्ना अवार्ड विभिन्न हस्तियों द्वारा मिल चुका है।

– 2012 में एक प्रोग्राम में रामशरण को सम्मानित करते हुए पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने उन्हें खेती का जादूगर होने की संज्ञा दी थी।

पीएम मोदी ने गुजरात में बीते साल देश के प्रगतिशील किसानो का सम्मलेन बुलाया था। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के हाथों भी सम्मान प्राप्त कर चुके हैं।