जानिये- नसबंदी कराने के बावजूद बीवी कैसे हुई प्रेग्नेंट, दिल्ली HC पहुंचा मामला

जानिये- नसबंदी कराने के बावजूद बीवी कैसे हुई प्रेग्नेंट, दिल्ली HC पहुंचा मामला

नई दिल्ली । परिवार सेवा क्लिनिक में कराई गई नसबंदी के असफल होने पर 28 वर्षीय महिला ने दिल्ली सरकार से मुआवजा मागा है। नसबंदी असफल होने से महिला चौथी बार गर्भवती हो गईं। इस संबंध में महिला ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। न्यायमूर्ति विभू बाखरू की अदालत में याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। हालांकि न्यायमूर्ति बाखरू उस दिन अदालत में मौजूद नहीं थे।

लिहाजा याचिका पर सुनवाई के लिए अब 16 जनवरी की तारीख तय की गई है। महिला ने पिछले साल नौ अगस्त को नसबंदी कराई थी।

वकील सिजा नायर पाल के जरिये दायर याचिका में दलील दी गई है कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की पुरुष और महिला नसबंदी सेवाओं के मानकों में स्पष्ट रूप से यह कहा गया है कि नसबंदी की सर्जरी के बाद गर्भवती होने वाली महिला को गर्भपात कराने की पेशकश की जानी चाहिए। यदि वह गर्भ रखना चाहती है तो गर्भावस्था के दौरान उसे चिकित्सा सहायता मुहैया कराई जानी चाहिए।

याचिका में दावा किया गया है कि क्लीनिक ने गर्भपात करने के बदले में 3,000 रुपये की मांग की थी। गर्भपात का खर्चा नहीं उठा सकने के कारण महिला ने गर्भ रखने का फैसला किया था।

बाद में आठ नवंबर को उन्होंने बच्ची को जन्म दिया। याचिकाकर्ता के मुताबिक केंद्र की योजना के अनुसार