किताबों की जगह गांजा के धुएं में कैद होता विद्यार्थियों का भविष्य

किताबों की जगह गांजा के धुएं में कैद होता विद्यार्थियों का भविष्य

नोएडा : पश्चिम बंगाल से लाया गया डेढ़ सौ किलो गांजा नॉलेज पार्क के उन विद्यार्थियों को बेचा जाना था, जिनके अभिभावक खून पसीने की कमाई से लाडले का भविष्य संवारने में कोई कसर नहीं छोड़ते।

हजारों किलोमीटर घर से दूर आकर विद्यार्थी नॉलेज पार्क में शिक्षा ग्रहण करते हैं। लेकिन उन्हीं विद्यार्थियों के अभिभावकों को इस बात की भनक भी नहीं होती है कि उनके लाडले का भविष्य किताबों की जगह गांजे के धुएं में धुंधला होता जा रहा है।

कॉलेजों के आस-पास गांजे की जमकर तस्करी होती है। कॉलेज के छात्रावास में विद्यार्थी के एक फोन पर महज दस से पंद्रह मिनट के अंदर गांजा उपलब्ध हो जाता है। जीबीयू में बीते दिनों छात्रावास में एक विद्यार्थी के पास से गांजा पकड़ा गया था।

लेकिन ऊंची पहुंच के चलते विवि प्रशासन ने विद्यार्थी पर कार्रवाई से हाथ पीछे खींच लिए थे।

उत्तर प्रदेश सरकार की गाइडलाइन को गौतमबुद्धनगर जिला प्रशासन ने दरकिनार कर दिया है। गाइड लाइन के मुताबिक किसी भी शिक्षण संस्थान के आस-पास 200 मीटर तक बीड़ी पान सिगरेट की दुकान नहीं होनी चाहिए।

नॉलेज पार्क स्थित कॉलेज के सामने नशे की दुकानें धड़ल्ले से संचालित हो रही हैं।

जिला प्रशासन द्वारा इन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। यही कारण है कि विद्यार्थी को आसानी से कॉलेज के पास गांजा की डिलीवरी मिल जाती है और पढ़ाई करने के बजाय विद्यार्थी गांजा पीकर पूरे दिन नशे में धुत रहते हैं।

इसके कई उदाहरण भी बीते दिनों देखने को मिले।

कई विद्यार्थी गांजे की लत में इस कदर डूब गए हैं कि वह कॉलेज भी नहीं जाते, उपस्थिति के अभाव में उनको परीक्षा देने से वंचित रखा जाता है।

महिला रहती है ऑटो में सवार

नॉलेज पार्क में एक महिला बेहद चर्चित है जो कि ऑटो में सवार होकर विद्यार्थियों को गांजा बेचती है। इसके अलावा एक वैगन आर कार सफेद रंग की भी गांजा तस्करों के पास है।

कार सवार तस्कर अक्सर नॉलेज पार्क में विद्यार्थियों को गांजा बेचता है। सूत्र बताते है कि गांजा बेच कर तस्कर ने मोटी संपत्ति अर्जित कर ली है। पचास लाख के गांजे को तस्कर अपने मजबूत नेटवर्क की वजह से महज दो से तीन महीने में बेच देते है।

विद्यार्थियों को दिया जाता है विजि¨टग कार्ड

यदि कोई छात्र गांजा खरीदने के लिए किसी पान वाले या ठेली वाले से संपर्क करता है तो विद्यार्थी को एक विजि¨टग कार्ड दे दिया जाता है, उसमें एक व्यक्ति का फोन नंबर, नाम और सर्विस 24 घंटे उपलब्ध लिखा रहता है।

जिससे कि किसी को शक न हो। यदि उस नंबर पर कोई व्यक्ति फोन करता है तो सामने वाला व्यक्ति कहता है कि टिफिन सर्विस 24 घंटे उपलब्ध रहती है। जिससे कि यदि पुलिस उसको अपने जाल में फंसाना चाहे तो वह बच जाए।

दस बजे के बाद दोगुना रेट

सूत्र बताते है कि यदि कोई विद्यार्थी रात दस बजे के बाद गांजा खरीदने के लिए तस्कर को फोन करता है तो तस्कर गांजे के दो गुना रेट वसूलते हैं।

फुटकर में पुड़िया बनाकर गांजा बेचने वाले तस्कर दिन में पांच ग्राम गांजा का 60 रुपये लेते है, जबकि रात दस बजे के बाद पांच ग्राम गांजा की पुड़िया 120 रुपये की मिलती है।

गांजा बेचने वाले तस्करों के खिलाफ पुलिस का अभियान लगातार जारी रहेगा। यदि किसी के पास गांजा तस्कर से संबंधित कोई भी सूचना हो तो वह मुझे दे सकता है, उसका नाम गुप्त रखा जाएगा। गांजा तस्करों को किसी भी कीमत पर क्षेत्र में नशे का कारोबार नहीं करने